Niccolò Machiavelli
'उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपनाए गए साधन उचित माने जाते हैं - द प्रिंस (इतालवी: इल प्रिन्सिपे; लैटिन: दे प्रिन्सीपेटीबस) 16वीं शताब्दी का एक राजनीतिक ग्रंथ है, जिसे इतालवी राजनयिक और राजनीतिक विचारक निकोलो मैकियावेली ने नए शासकों और राजपरिवारों के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में लिखा था। द प्रिंस का मुख्य विचार यह है कि शासक के उद्देश्यों, जैसे राज्य की सुरक्षा, स्थिरता और यश की प्राप्ति के लिए कभी-कभी नैतिक दृष्टि से अनुचित साधनों का प्रयोग भी उचित ठहराया जा सकता है। यह पुस्तक चेतावनी देती है कि यदि किसी राज्य का उचित ढंग से शासन नहीं किया जाए, तो अंततः उसका पतन होना निश्चित है और उसका दुष्परिणाम शासक को ही भुगतना पड़ता है। इसमें युद्ध की कला और रणनीति का विस्तार से वर्णन किया गया है। साथ ही, एक आदर्श शासक के गुणों, उसकी दूरदर्शिता और विवेक पर भी प्रकाश डाला गया है। यह पुस्तक शासन-कला के महत्त्वपूर्ण सिद्धांतों की शिक्षा देती है और यह समझाती है कि किसी राज्य की वास्तविक शक्ति का आकलन कैसे किया जाना चाहिए। आधुनिक राजनीतिक दर्शन की प्रारंभिक और सर्वाधिक प्रभावशाली कृतियों में से एक द प्रिंस में निकोलो मैकियावेली ने यह विश्लेषण किया है कि इटली के शासक अपने राज्य क्यों खो बैठे। उन्होंने यह पुस्तक लोरेंज़ो दे मेडिची को समर्पित की, क्योंकि उनका विश्वास था कि वही इटली को स्वतंत्रता और एकता की दिशा में ले जा सकते हैं। ऐतिहासिक उदाहरणों से समृद्ध यह ग्रंथ आज भी अपने पाठकों को गहराई से प्रभावित करता है और उनके भीतर छिपे नेतृत्व-बोध को जागृत करता है।'