Kanwar Gautam
लोग उसका रूप याद रखते हैं। पर उसका साहस भूल जाते हैं।शकुंतला और दुष्यंत प्राचीन भारतीय कथा का एक साहित्यिक पुनर्कथन है, जिसमें शकुंतला को केवल सौंदर्य, प्रेम और विरह की प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि अपने निर्णय स्वयं लेने वाली एक विवेकशील, साहसी और स्वाभिमानी स्त्री के रूप में देखा गया है।कण्व के आश्रम में पली शकुंतला का जीवन तब बदलता है जब राजा दुष्यंत उसके संसार में प्रवेश करते हैं। प्रेम जन्म लेता है, लेकिन उसके साथ प्रश्न भी आते हैं-वचन का मूल्य क्या है? सत्ता के सामने सत्य की क्या जगह है? और जब स्मृति, परिस्थिति और राजधर्म एक-दूसरे से टकराएँ, तो न्याय किसे कहा जाए?यह उपन्यास महाभारत और कालिदास की शकुंतला-कथा की परंपराओं से प्रेरणा लेते हुए परिचित कथा को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। इसमें प्रेम के साथ-साथ निर्णय, उत्तरदायित्व, आत्मसम्मान, मातृत्व और क्षमा जैसे विषय भी केंद्र में हैं।यह किसी प्राचीन ग्रंथ का शाब्दिक अनुवाद नहीं, बल्कि आधुनिक हिंदी पाठक के लिए लिखा गया एक साहित्यिक पुनर्कथन है।For English-speaking readers:Shakuntala aur Dushyant is a Hindi literary retelling of the classical Shakuntala-Dushyanta story, inspired by traditions found in the Mahabharata and Kalidasa. The novel places particular emphasis on Shakuntala’s judgment, courage, self-respect, choices, and responsibility for those choices.Language: Hindi